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नंदा देवी राज जात यात्रा: एक यात्री की डायरी

सुबह की पहली किरण के साथ, हमारी यात्रा नौटी गाँव से शुरू होती है, जहाँ स्थानीय मुखिया द्वारा चार सींग वाले भेड़ को पवित्र करने की रस्म अदायगी की जाती है। ‘जै मा नंदा देवी’ के जयकारे हमारे चारों ओर गूँज उठते हैं, और हम, भक्तों का एक समूह, अपनी आस्था की डोर से बंधे, इस पावन यात्रा का आरंभ करते हैं।

पहला पड़ाव है लोहाजंग, जहाँ से हम वाण और फिर बेदिनी बुग्याल की ओर बढ़ते हैं। यह रास्ता न केवल हमें अपनी आध्यात्मिक यात्रा में गहराई तक ले जाता है, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता के अनुपम दृश्य भी प्रस्तुत करता है। बेदिनी बुग्याल की लहलहाती हरियाली में, हम देवी के लिए दूध और चावल की पेशकश करते हैं, और यहाँ की शांति में कुछ पल विश्राम करते हैं।

रूपकुंड की ओर बढ़ते हुए, हमारी यात्रा अधिक कठिन हो जाती है। यहाँ की रहस्यमयी झील के किनारे पहुँचकर, हम ‘देवी के बिछावन’ पर फूल चढ़ाते हैं। यहाँ से हिमालय की चोटियाँ जैसे स्वर्ग का द्वार खोलती हैं, और प्रकृति की इस अद्भुत कलाकृति के बीच खड़े होकर, मैं महसूस कर सकता हूँ कि कैसे हमारी पूरी यात्रा एक आध्यात्मिक उद्दीपन का सृजन करती है।

अंतिम पड़ाव, होमकुंड, जहाँ यात्रा का समापन होता है। यहाँ भेड़ को छोड़ने का कृत्य, समुदाय के पापों को विसर्जित करने का प्रतीक है। इस क्षण, जब भेड़ पर्वतों में अदृश्य हो जाती है, हम भी अपने भीतर की नकारात्मकताओं को छोड़ देने का प्रयास करते हैं।

वापसी का मार्ग शांत है। हम में से प्रत्येक अपने दिल में देवी का आशीर्वाद और पवित्रता की एक नई भावना लेकर लौटता है। नंदा देवी राज जात यात्रा केवल एक तीर्थ नहीं बल्कि जीवन का एक पाठ है, जो हमें सिखाता है कि कैसे आस्था, समुदाय, और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके एक सार्थक जीवन जीया जा सकता है।

*यह डायरी प्रविष्टि काल्पनिक है, मूल यात्रा के आधार पर बनाई गई है।

Nanda Raj Jaat Yatra
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