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musical instruments in Garhwali dance: A musical heritage

गढ़वाल की वादियों में नृत्य की थाप और संगीत की मधुर धुनें जब वातावरण में गूंजती हैं, तो प्रत्येक पारंपरिक उत्सव और सामाजिक समारोह जीवन्त हो उठता है। इस संगीत की आत्मा उन वाद्य यंत्रों में बसती है, जिन्हें गढ़वाल के कुशल संगीतकार हुनर और परंपरा के साथ बजाते हैं। ये वाद्य यंत्र न केवल गढ़वाली नृत्य के लिए आवश्यक संगीत प्रदान करते हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपरा के प्रतीक भी हैं। आइए, इस लेख में हम उन वाद्य यंत्रों की यात्रा करते हैं, जो गढ़वाली नृत्य को अपनी धुनों से सजीव बनाते हैं।


ढोल

ढोल गढ़वाल के लोक संगीत में मुख्य वाद्य यंत्र है। यह लकड़ी से बना एक बड़ा डबल-साइडेड ड्रम है, जिसे दोनों तरफ से बकरी की खाल की मदद से ढंका जाता है। इसकी गूँजती हुई ध्वनि नृत्यकलाओं और उत्सवों में उत्साह भर देती है। पारंपरिक रूप से, इसे विवाह और धार्मिक समारोहों में बजाया जाता है, जहाँ इसकी थाप से नर्तकियों के कदमों में नई ऊर्जा आ जाती है।

दमऊ

दमाऊ एक छोटा ड्रम है जिसे लकड़ी और धातु से बनाया जाता है। इसे एक हाथ से पकड़कर दूसरे हाथ से छड़ी से बजाया जाता है। इसकी ध्वनि मधुर और गहरी होती है, जो लोक गीतों और नृत्यों में खास तरह की लय प्रदान करती है। दमाऊ का उपयोग मुख्यतः धार्मिक अनुष्ठानों में होता है।

तुरी

तुरी एक पीतल की बनी परंपरागत तुरहीजैसी है, जिसे विशेष रूप से उत्सवों और मेलों में बजाया जाता है। इसकी तेज और मेलोडियस ध्वनि नृत्य में उल्लास और उत्साह का संचार करती है। तुरी की ध्वनि दूर-दूर तक सुनाई देती है, जो लोगों को एकत्रित करने में मदद करती है और पर्व की शोभा बढ़ाती है।

रणसिंघा

रणसिंघा, जो एक प्राचीन वाद्य यंत्र है, पीतल से बना होता है और इसका आकार लंबा और घुमावदार होता है। इसे विशेष रूप से युद्ध के समय और विशेष अनुष्ठानों में बजाया जाता था। इसकी गहरी और गूंजने वाली ध्वनि नृत्य में साहस और शक्ति का प्रतीक है।

थाली

थाली एक साधारण मेटल की प्लेट होती है जिसे बजाने के लिए एक छोटी छड़ी का उपयोग किया जाता है। इसकी टिक-टिक की ध्वनि नृत्य की लय को स्थिर रखने में मदद करती है। यह विशेषकर तब प्रयोग की जाती है जब नृत्य में जटिल फुटवर्क होता है।

मोरचंग

मोरचंग एक छोटा माउथ-ऑर्गन जैसा वाद्य यंत्र है, जिसे खेलने के लिए मुँह से हवा फूंकी जाती है। इसकी विशिष्ट ध्वनि नृत्य को एक अलग पहचान देती है और अक्सर संगीत के बीच में इसका उपयोग किया जाता है।

हुड़का

हुड़का गढ़वाली संगीत का एक प्रमुखवाद्य है जो ड्रम की तरह होता है लेकिन इसे विशेष रूप से होली के त्योहार में बजाया जाता है। इसे एक मुड़े हुए डंडे से बजाया जाता है, और इसकी ध्वनि गहरी और गूंजने वाली होती है जो राधा-कृष्ण की कथाओं के संगीत को सजीव बनाती है।

मसकभाजा

मसकभाजा, जिसे बैगपाइप की तरह देखा जा सकता है, एक विशिष्ट ध्वनि पैदा करता है जो गढ़वाल के पर्वतीय परिवेश की याद दिलाती है। इसकी मेलोडियस ध्वनि नृत्य में एक रहस्यमयी और मनमोहक अनुभव जोड़ती है, जो कई पीढ़ियों से गढ़वाली लोगों के दिलों को छूती आ रही है।

अलगोजा

अलगोजा में दो बांसुरियों को एक साथ बजाया जाता है, जिससे एक साथ दो अलग-अलग स्वर उत्पन्न होते हैं। इस वाद्य यंत्र का प्रयोग गढ़वाली संगीत में एक विशेष ध्वनिक परिवेश बनाता है जो श्रोताओं को गहराई से प्रभावित करता है।

भंकोरा

भंकोरा एक लंबा, धातु से बना हुआ वाद्य यंत्र है जिसे खासतौर से धार्मिक अनुष्ठानों और मेलों में बजाया जाता है। इसकी गहरी और गूँजने वाली ध्वनि अनुष्ठानों में दिव्यता का आभास कराती है और इसे बजाने वाला कलाकार इसके माध्यम से समुदाय के लोगों को आकर्षित करता है।


इन पारंपरिक वाद्य यंत्रों का महत्व केवल गढ़वाली संगीत और नृत्य में ही नहीं, बल्कि यहाँ की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं में भी गहराई से निहित है। ये वाद्य यंत्र न केवल एक सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि किस प्रकार संगीत की बारीकियाँ और ताल की थाप समुदाय के लोगों को एक साथ लाती है। इन वाद्य यंत्रों को बजाना न केवल कलात्मक कौशल मांगता है बल्कि यह भी बताता है कि कैसे पीढ़ियों से ये कला यहाँ के लोगों में रची-बसी है। इस प्रकार, ये वाद्य यंत्र गढ़वाली जीवन की आत्मा को संजोये हुए हैं।

वर्तमान और भविष्य के कलाकारों के लिए, इन पारंपरिक वाद्य यंत्रों का अध्ययन और अभ्यास न केवल उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ता है बल्कि एक व्यापक मंच पर अपनी संस्कृति को प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान करता है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि संगीत और नृत्य के छात्र इन वाद्य यंत्रों के महत्व को समझें और उन्हें संरक्षित करने के साथ-साथ उन्हें आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य करें। इन वाद्य यंत्रों की ध्वनियाँ न केवल गढ़वाली संगीत को अमर बनाती हैं बल्कि विश्व संगीत के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति की एक स्थायी पहचान स्थापित करती हैं।


Musical Instruments of Uttarakhand
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